Ratlam: या हुसैन या हुसैन कहकर ईमाम हुसैन की शहादत को याद करेंगे

  
Last Updated:  जुलाई 16, 2024 " 08:49 पूर्वाह्न"

रतलाम/ सैलाना। दाऊदी बोहरा समुदाय के सबसे बड़े पर्व अशरा मुबारका का समापन या हुसैन या हुसैन की निदा के साथ हुआ, बता दे कि अशरा मुबारका का पर्व इस्लामिक साल के पहले माह मोहर्रम के शुरआती दस दिनों का होता है। इन दिनों में हज़रत पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन का करबला के तपते मैदान में हिजरी सन् ६१ में यजीदी लश्कर द्वारा तीन दिन तक भूखा प्यासा रखने के बाद मोहर्रम की दसवीं तारीख यौमे आशूरा को उनके 72 साथियों सहित कत्ल किया गया था , उन्हीं शहीदों के गम में दुनिया भर के दाऊदी बोहरा समुदाय के लोग अशरा मुबारका का पर्व मनाते हैं।

समाज के प्रवक्ता बुरहान लुकमानी ने बताया कि बरसों से चली आ रही परम्परा अनुसार इस वर्ष भी समाज के लोगों ने 9 दिनों तक सुबह और शाम मस्जिद में एकत्रित होकर ईमाम हुसैन पर हुए ज़ुल्म को याद किया और मातम किया। मोहर्रम की दूसरी तारीख से प्रतिदिन सुबह मस्जिद में धर्मगुरु हिज होलीनेस डॉक्टर सैय्यदना मुफद्दल सैफुद्दीन साहब के घराने के जनाब अब्दे अली द्वारा वाअज़ (प्रवचन) की गई , जिसमें उन्होंने ईमाम हुसैन के संदेशों को समाजजनों तक पहुंचाकर सच्चाई और ईमान के रास्ते पर चलने का संदेश दिया गया।

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