खरीफ फसल में कीट व्याधि से बचाव एवं नियंत्रण हेतु सोयाबीन एवं मक्का फसल का अवलोकन-
Last Updated: जुलाई 28, 2020 " 10:09 अपराह्न"
रतलाम: 28 जुलाई 2020(स्पष्ट खबर)| उपसंचालक, कृषि श्री ज्ञानसिंह मोहनिया एवं कृषि विकास अधिकारी श्री सोलंकी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा मंगलवार को ग्राम मूंदडी, सरवनी जागीर, पिपलखूंटा आदि ग्रामों का भ्रमण कर खरीफ फसल में कीट व्याधि से बचाव एवं नियंत्रण हेतु सोयाबीन एवं मक्का फसल का अवलोकन किया गया। ग्रामीण कृषकों जगदीश, कैलाश, शोभाराम, गेंदालाल, अंबालाल, धूलजी आदि को मौके पर ही मक्का फसल में फाल आर्मी वर्म के नियंत्रण के लिए एमामेक्टिन बेंजोएट 0.4 ग्राम प्रतिलीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव की सलाह दी गई। जिले में खरीफ फसलों में अभी तक डेढ माह से अधिक अवधि हो गई है। कुछ क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से उन क्षेत्रों में पानी की आवश्यकता महसूस की जा रही है। कृषकों को सलाह दी गई कि खेत की नमी को बनाए रखने के लिए निंदाई, गुडाई, डोरा चलाएं एवं खेतों की जमीन में दरारे पडने से पहले ही फसलों जीवनरक्षण सिंचाई करें। सोयाबीन में गर्डल बीटल का प्रयोग देखते ही प्रोफेनोफास 50 ईसी, 1250 मि.ली प्रति हैक्टेयर या ट्रायजोफास 4.0 ईसी 800 मिली लीटर प्रति हैक्टेयर की दर से किसी एक दवा का पानी में घोलकर छिडकाव करें। सोयाबीन की फसल में पीला मोजेक वायरसजनित बीमारी के प्रकोप को देखते ही इसके फैलाव को रोकने हेतु प्रारम्भिक अवस्था में ही अपने खेत में जगह-जगह पीला चिपचिपा ट्रेप कार्ड लगाएं जिससे इसका संक्रमण फैलाने वाली सफेद मक्खी का नियंत्रण होने में सहायता मिलेगी। रोग से ग्रसित पौधों को निकालकर गड्ढे में डालकर मिट्टी से ढंक दें। सफेद मक्खी के नियंत्रण हेतु पूर्व में मिश्रित बीटो सायफ्लूथिन के सात इमिडाक्लोप्रिड 350 मि.ली./हेक्टेयर या पूर्व मिश्रित थायोमिथाक्सम एवं लेम्डासायक्लोथ्रिन 125 मि.लि. हेक्टेयर के मान से सि एक दवा का छिडकाव करें। मक्का फसल में कहीं-कहीं पर फाल आर्मी वार्म कीट का प्रकोप देखने में आया है। कृषक इमामेक्टिन बेंजोएट 0.4 ग्राम प्रतिलीटर पानी या स्पाईनोसेड 0.3 मिलीलीटर प्रतिलीटर पानी दोनों में से किसी एक दवा का छिडकाव करें। उक्त पौध संरक्षण दवा 20 दिन बाद पुनः दोहराने से कीट का पूर्ण नियंत्रण किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं विकासखण्ड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से सम्पर्क कर सकते हैं।