रतलाम:11 जून 2020(स्पष्ट खबर)| किसान भाई खरीफ में सोयाबीन के बजाए अधिक उत्पादन देने वाली मक्का फसल की किस्मों को लगाकर अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। संकर मक्का की फसल से मौसम अच्छा रहा तो औसत उपज 50 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त कर सकते हैं। किसान भाई इस वर्ष मक्का का रकबा बढा कर अच्छी उपज प्राप्त करे।
उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने बताया कि जिन किसाई भाइयों के पास राष्ट्रीयकृत बैंकों के किसान क्रेडिट कार्ड हैं, वे किसान बेसलडोज (बोनी पूर्व) उपयोग में आने वाले उर्वरकों जैसे डीएपी, एनपीके 12:32:16, पोटाश, सुपर फास्फेट, मिक्सर, उर्वरक को क्रय कर भण्डारित कर लें, ताकि बोनी शुरू होने पर उर्वरको के लिए इधर-उधर भटकना ना पडे। इस समय प्राथमिक साख सहकारी समितियों में पर्याप्त उर्वरकों का भण्डारण किया गया है। किसान भाई सोयाबीन बीज की कमी को देखते हुए गत वर्ष में उत्पादित नवीन किस्मों के घरु बीजों की सफाई, ग्रेडिंग, अंकुरण, परीक्षण कर बीज उपचारित कर बीज के रुप में उपयोग करें।
सोयाबीन फसल को खरीफ की अन्य फसलों के साथ अंतवर्ती के रुप में जैसे सोयाबीन एवं अरहर, सोयाबीन एवं मक्का लिया जाए ताकि कीट नियंत्रण किया जा सके। सोयाबीन की एकल पद्धति के बजाए बहुफसलीय फसल पद्धति में तीन-चार फसलों जैसे मक्का, उडद, मूंग, मूंगफली फसलों को लगाया जाए। सोयाबीन की बोनी रेज्डबेड पद्धति एवं रिजफरो पद्धति से बोनी करें। नियमित मानसून के पश्चात लगभग चार इंच वर्षा के बाद ही बोनी कार्य करें। मानसून पूर्व आधार पर बोनी करने से सूखे का लंबा अन्तराल रहने पर फसलों को नुकसान हो सकता है, इसलिए पर्याप्त वर्षा होने पर ही बुआई करें।