आवासीय भूखण्ड पट्टों की जांच आखिर कब ?

  
Last Updated:  फ़रवरी 20, 2020 " 08:42 पूर्वाह्न"

रतलाम/धामनोद, 20 फरवरी (स्पष्ट खबर)। मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के धामनोद में सन 1995 से 2009 तक तत्कालीन ग्राम पंचायतों व्दारा अपने कार्यकाल में दिये गये आवासीय भूखण्ड पट्टे वर्तमान में नगर परिषद के नगर विकास कार्यों में रोड़ा बनकर, नगर का स्वरूप बिगाड़ने के साथ ही कानुन व्यवस्था बाधित करने एंव अशांति फैलाने का कारण बन रहे हैं।
तत्कालीन ग्राम पंचायतों व्दारा शासकीय भूमि पर नियम विरुद्ध अपात्रों को आवासीय भूखण्ड़ पट्टे की रेवड़ियां बांटने का मामला प्रकाश में आया है।

क्या स्वेच्छानुदान के मामले में तत्कालीन समय में विधायकों से अधिक पावर सरपंचों के पास थे?

किसी गरीब व्यक्ति की आर्थिक मदद् के विधायक के पास शासन का सिमित मद रहता है
और उसमें से जरुरतमंद गरीब व्यक्ति की आर्थिक मदद के लिए शासन की और से निर्धारित राशि को विधायक स्वेच्छानुदान कर सकते हैं।
लेकिन सरपंचों ने सन 1995 से 2009 तक बहुउपयोगी लाखों रुपये किमत की शासकीय भूमि की रेवड़ियां अनुदान में बाट दी गई, और उक्त समय में तत्कालीन ग्राम पंचायत से अनुदान में प्राप्त बड़ी संख्या में आवासीय भूखण्ड पट्टे की खरीदी- ब्रिकी की गई है,
तथा कई अपात्रों के भूखण्ड प्लांट आज दिनांक तक यथावत स्थित में पड़े हैं जिन पर कोई निर्माण नहीं हुआ है तो वहीं जिनहोने निर्माण किया है उन मैसे ज्यादातर लोगों ने भैंसों के तबेले बना रखे हैं जो स्पष्ट इंगित करता हैं कि सन 1995 से 2009 तक की तत्कालीन ग्राम पंचायतों ने स्वयंभू बन कर अपात्रों में आवासीय भूखण्डों की रेवड़ियां बाट कर शासकीय भूमि को लूटाई है।

सन 2005 से 2009 तक में सबसे अधिक फर्जीवाड़ा

यू तो सन 1995 से 2009 तक तत्कालीन ग्राम पंचायतों व्दारा जारी किये गए आवासीय भूखण्ड पट्टे जांच की जद में आते हैं
फिर भी सन 2005 से 2009 तक के ग्राम पंचायत कार्यालय में जम कर शासकीय भूमि का दूरउपयोग कर नियम विरुद्ध अपात्रों को आवासीय भूखण्ड पट्टों की रेवड़ियां बाट दी है
जिस में एक परिवार में एक से अधिक , संपन्न परिवारों को, शासकीय कर्मचारियों को, तत्कालीन ग्राम पंचायत पंचों के परिवारों में भी आवासीय भूखण्ड पट्टों की रेवड़ियां लूटाई है।

इन क्षेत्रों में बटी भूखण्ड पट्टों की रेवड़ियां-

तत्कालीन ग्राम पंचायत व्दारा शमशान रोड़, दीनदयाल नगर, संजय कालोनी, नई आबादी, खेड़ा, गांधी चौक, अन्य क्षेत्र समेत गंगायतता नाले का भी गला घोट कर आवासीय भूखण्ड पट्टे दिये है
और इन मैसे कुछ का नामांतरण ग्राम पंचायत कार्यालय में किया गया तथा कुछ का नगर परिषद कार्यकाल में किया गया है,
कुछ मामलों में तो तथाकथित लोगों ने ग्राम पंचायत से एक भूखण्ड पट्टा लेकर दो भूखण्ड पर कब्जा कर रखा है जिसको दोनों भूखण्ड पर अलग अलग दिखाया जा रहा है
तो वहीं कुछ ऐसे मामले भी है
जिनमें पात्र लोगों के भूखण्ड पर अपात्रों ने धन बल से कब्जा किया हुआ है
जिसकी लिखीत शिकायतें भी होती रही हैं
इस पूरे मामले में बिंदुवार जाच के कानुनी कारवाई हो, जिस से भविष्य में धामनोद नगर नियम व प्रक्रियाओं के अनुरूप आकार ले सकेगा।

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