सुप्रीम कोर्ट ने प्रबंधन के संबंध में त्रावणकोर के शाही परिवार के सुझाए गए दो संशोधनों स्वीकार कर लिया है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने दोनों कमिटी के गठन के लिए 4 हफ्ते का वक्त दिया है।

पद्मनाभ स्वामी मंदिर
तिरुवनंतपुरम
केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर में वित्तीय गड़बड़ी को लेकर प्रबंधन और प्रशासन के बीच चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने प्रबंधन के संबंध में त्रावणकोर के शाही परिवार के सुझाए गए दो संशोधनों स्वीकार कर लिया है। अब नए प्रावधानों के मुताबिक अगर तिरुवनंतपुरम के अतिरिक्त जिला जज कोई गैर हिंदू है, तो एक हिंदू मंदिर की प्रशासनिक समिति का हिस्सा होगा।
दूसरे प्रावधान के अनुसार, केरल के एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज मंदिर के सलाहकार समिति के प्रमुख होंगे। यह समिति मंदिर से जुड़े नीतिगत मामलों पर अपना फैसला लेगी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों कमिटी के गठन के लिए 4 हफ्ते का वक्त दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मानी राज परिवार की सिफारिशें
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पद्मनाभस्वामी मन्दिर के प्रबंधन में त्रावणकोर के राजपरिवार के अधिकार को मान्यता दी थी। अब कोर्ट ने मान लिया है कि अगर तिरुवनंतपुरम का अतिरिक्त जिला जज गैर हिंदू रहा तो एक अन्य हिंदू शख्स मंदिर के प्रशासनिक समिति का हिस्सा होगा।
- कलियुग की शुरुआत में बना था पद्मनाभ मंदिरदेश का सबसे अमीर मंदिर माने जाने वाले पद्मनाभ का निर्माण कब हुआ था, इसकी ठीक-ठीक जानकारी किसी को नहीं है। इतिहासकार बताते हैं कि यह मंदिर लगभग 5 हजार साल पुराना है। धर्मशास्त्र के विद्वान बताते हैं कि जब मानव सभ्यता कलियुग में पहुंची थी, तभी इस मंदिर का निर्माण कराया गया था।
- त्रावणकोर के राजाओं ने बनवाया था मंदिरहालांकि, मंदिर की संरचना को देखकर कहा जाता है कि इसकी स्थापना सोलहवीं सदी में त्रावणकोर के राजाओं ने की थी। साल 1750 में महाराज मार्तंड वर्मा ने खुद को पद्मनाभ मंदिर का दास घोषित कर दिया था। इसके साथ ही पूरा राजघराना मंदिर से जुड़ गया और उसकी सेवा में जुट गया। बताया जाता है कि राजा मार्तंड ने अपनी सारी संपत्ति मंदिर को दान कर दी थी। शाही घराने के अधीन एक ट्रस्ट आज भी मंदिर की देखरेख करता है।
- रेत का कण भी नहीं ले जाता शाही परिवारत्रावणकोर राजपरिवार के सदस्य खुद को पद्मनाभस्वामी का दास कहते हैं। वे भगवान की संपत्ति से एक भी पैसा न लेने को संकल्पबद्ध हैं। मंदिर से बाहर निकलते वक्त राजपरिवार के सदस्य पैरों में लगी रेत साफ कर देते हैं। वे पद्मनाभस्वामी से संबंधित रेत का एक कण भी घर नहीं ले जाते।
- पांच तहखानों में लाखों करोड़ का खजानापद्मनाभ मंदिर में 6 तहखाने हैं। सात सदस्यीय टीम अब तक मंदिर के पांच तहखाने खोल चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने छठा तहखाना खोलने पर रोक लगा दी है। अब तक खोले जा चुके तहखानों से दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का खजाना बरामद हो चुका है। यह केंद्रीय शिक्षा बजट और राज्य बजटों से भी ज्यादा है।
- त्रावणकोर के राजाओं ने छिपाया था खजानाबताया जाता है कि त्रावणकोर के महाराज ने बेशकीमती खजाने को इस मंदिर के तहखाने और मोटी दीवारों के पीछे छुपाया था। इसके बाद हजारों सालों तक किसी ने इन दरवाजों को खोलने की हिम्मत नहीं की। इस तरह से बाद में इसे शापित माना जाने लगा। कथाओं के अनुसार, एक बार खजाने की खोज करते हुए किसी ने 7वें दरवाजे को खोलने की कोशिश की, लेकिन कहते हैं कि जहरीले सांपों के काटने से सबकी मौत हो गई।
- कवि के दस्तावेजों में खजाने का राज़मंदिर में भारी मात्रा में खजाने की मौजूदगी ज्ञात है। मलयाली कवि उल्लूर एस. परमेश्वर द्वारा संग्रहीत ‘प्रधानपेट्टा मथिलकोम’ दस्तावेजों में इसका जिक्र है। दस्तावेजों में गुप्त कमरों का उल्लेख है, जिनसे अब खजाना निकाला जा रहा है।
- राजपरिवार करता है मंदिर की देख-रेखत्रावणकोर 1949 में ही भारतीय संघ में शामिल हो गया था, लेकिन मंदिर का प्रबंधन अब भी राजपरिवार के लोगों के पास है। प्राचीनकाल में त्रावणकोर की सीमाएं कन्याकुमारी से एर्नाकुलम स्थित अलुवा तक फैली थीं। उस वक्त केरल की राजधानी पद्मनाभपुरम (अब तमिलनाडु में) थी। बाद में तिरुअनंतपुरम को इसकी राजधानी बना दिया गया।
पिछले 9 साल से लंबित है विवाद
सुप्रीमक कोर्ट में पद्मनाभ स्वामी मंदिर में वित्तीय गड़बड़ी को लेकर प्रबंधन और प्रशासन का विवाद पिछले 9 साल से कोर्ट में लंबित था। केरल हाई कोर्ट के फैसले को त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
मंदिर के पास 2 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति
बताया जाता है कि मंदिर के पास तकरीबन दो लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। 9 साल पहले जब मंदिर के तहखाने खोले गए थे, तब लाखों करोड़ के खजानों को देखकर देश ही नहीं दुनिया भर के लोगों की हैरानी का ठिकाना नहीं रहा था।
5 हजार साल पुराना है मंदिर
देश का सबसे अमीर मंदिर माने जाने वाले पद्मनाभ का निर्माण कब हुआ था, इसकी ठीक-ठीक जानकारी किसी को नहीं है। इतिहासकार बताते हैं कि यह मंदिर लगभग 5 हजार साल पुराना है। धर्मशास्त्र के विद्वान बताते हैं कि जब मानव सभ्यता कलियुग में पहुंची थी, तभी इस मंदिर का निर्माण कराया गया था।
त्रावणकोर के राजा ने की थी मंदिर की स्थापना
हालांकि, मंदिर की संरचना को देखकर कहा जाता है कि इसकी स्थापना सोलहवीं सदी में त्रावणकोर के राजा ने की थी। साल 1750 में महाराज मार्तंड वर्मा ने खुद को पद्मनाभ मंदिर का दास घोषित कर दिया था। इसके साथ ही पूरा राजघराना मंदिर से जुड़ गया और उसकी सेवा में जुट गया। बताया जाता है कि राजा मार्तंड ने अपनी सारी संपत्ति मंदिर को दान कर दी थी। शाही घराने के अधीन एक ट्रस्ट आज भी मंदिर की देखरेख करता है।
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