रतलाम में सोमवार को 6 कोरोना मरीज जंग जीतकर अपने घर लौटे, 75 वर्षीय बकरीदन बी ने हौसले के साथ कोरोना से जंग जीती
Last Updated: मई 11, 2020 " 05:53 अपराह्न"
रतलाम :11 मई 2020(स्पष्ट खबर), 11 मई का सोमवार रतलाम के लिए फिर खुशियां लेकर आया। रतलाम मेडिकल कॉलेज के कोविड-हॉस्पिटल से 6 कोरोना मरीज जंग जीतकर अपने घर लौटे। सोमवार की दोपहर हॉस्पिटल से स्वस्थ होकर जब बाहर निकले तो मौजूद कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी, मेडिकल कॉलेज डीन डॉक्टर संजय दीक्षित, अन्य डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा ढोल धमाके के साथ स्वस्थ हुए मरीजों का स्वागत किया गया। कोरोना योद्धाओं के अभिनंदन में उपस्थितजनों ने करतल ध्वनि की एंबुलेंस से उनको अपने घर पहुंचाया गया, वे 14 दिन होम क्वॉरेंटाइन में रहेंगे। सोमवार को जो मरीज स्वस्थ होकर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुए उनमें वार्ड नंबर 30 जावरा रोड की बकरीदन बी, शिवनगर के जगदीश, रानीपुरा के फारुख खान, जावरा रोड के शाहनवाज, बापू नगर की रुखसार, जावरा रोड के असलम खान शामिल हैं। अस्पताल में हमारी पूरी देखभाल की गई कोरोना से लड़कर स्वस्थ हुए मरीजों ने मेडिकल कॉलेज स्थित कोविड-19 हॉस्पिटल में डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टाफ एवं नर्सों द्वारा की गई देखभाल की तारीफ करते हुए कहा कि हॉस्पिटल में हमें किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी गई। जब भी जिस चीज की भी जरूरत थी, हमें उपलब्ध कराई गई। खाने से लेकर चाय और मेडिसिन हर एक चीज समय पर मिली। डाक्टर और स्टाफ का व्यवहार भी बहुत अच्छा था, इससे हमें स्वस्थ होने में बहुत मदद मिली। कोरोना बीमारी के संबंध में संदेश दिया कि इस बीमारी से डरे नहीं, समय पर अपना उपचार कराएं। अपना आत्मविश्वास बनाए रखें।
प्रेरक कहानी, अस्थमा की पुरानी पेशेंट 75 वर्षीय बकरीदन बी ने हौसले के साथ कोरोना से जंग जीती
रतलाम के मेडिकल कॉलेज स्थित कोविड-19 से स्थानीय जावरा रोड की रहवासी एक ऐसी बुजुर्ग महिला बकरीदन बी ने कोरोना से जंग जीती है जो 75 वर्ष की हो चुकी है। इसके अलावा वे अस्थमा की भी पुरानी पेशेंट है, उनको ब्लड प्रेशर की भी शिकायत है लेकिन उन बुजुर्ग महिला ने अपनी हिम्मत और हौसले से कोरोना से जंग जीतकर समाज को संदेश दिया है कि कोरोना से डरे नहीं, अपना आत्मविश्वास बनाए रखें। हिम्मत और मजबूती के साथ कोरोना का सामना करें, जीत अवश्य मिलेगी।
सोमवार को जब वे कोविड-19 हॉस्पिटल से स्वस्थ होकर बाहर निकली तब उनका हौसला देखने लायक था। उन्होंने उत्साह के साथ अपने दोनों हाथों से मौजूद व्यक्तियों का अभिवादन किया। उन्होंने हॉस्पिटल में डाक्टर तथा पैरामेडिकल स्टाफ एवं नर्सेज द्वारा की गई देखभाल की भी तारीफ की। बातचीत में बताया कि हॉस्पिटल में उनके सहित सभी मरीजों का पूरा ख्याल रखा गया। खाना, चाय-नाश्ता, मेडिसिन सभी टाइम टू टाइम मिलता था। स्टाफ का व्यवहार भी बेहद अपनत्व से भरा था, स्टाफ पूरे समय उनको दादी कहकर बुलाता रहा और मेरे मन में भी उन सबके लिए अपने बेटे, बेटियों, पोते, पोतियो जैसा अपनापन है।