पटवारी शीट में गड़बड़ी की शिकायत: किसान एवं पटवारी ने सोशलमीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से एक दूसरे के विरुद्ध लगाया आरोप

  
Last Updated:  सितम्बर 2, 2020 " 05:53 अपराह्न"

रतलाम/धामनोद: 2 सितंबर, 2020(स्पष्ट खबर)| पटवारी शीट में गडबडी के सम्बन्ध में धामनोद के किसानों ने ज्ञापन दिया, कलेक्टर को संबोधित ज्ञापन में बताया है कि एटलेन प्रोजेक्ट में कई सारी ऐसी घटनाएं सामने आई है,जिनमें एटलेन मे जा रही भूमियों को अधिग्रहित नहीं किया गया है,और एटलेन प्रोजेक्ट से दूर वाली जमीनों को अधिग्रहण कर लिया गया है। यही नहीं कई जमीनों के रकबे में भारी हेरफेर कर दिया गया है। कई भूमियों के सर्वे नम्बर ही गायब कर दिए गए है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने हलका पटवारी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उक्त पटवारी पिछले आठ वर्षों से धामनोद में पदस्थ है। ग्राम धामनोद का सन 1956-57 का राजस्व नक्शा तहसील कार्यालय में उपलब्ध नहीं होने से पटवारी वर्तमान शीट में मनमर्जी से हेरफेर करता रहा है।

वाट्सएप ग्रुपों में संबंधित पटवारी व किसान के बीच चली बहस चर्चा का विषय-

प्रतिकात्मक फोटो

उक्त विषय में ज्ञापन की खबर न्यूज़ पोर्टल एवं समाचार पत्रों में प्रकाशन के बाद सोशल मीडिया वाट्सएप ग्रुपों में फारवर्ड शेयर के बाद धामनोद के वाट्सएप ग्रुपों में संबंधित पटवारी एवं किसान के बीच शिष्टाचार मैसेज बहस चली,
आमतौर पर देखा जाता है कि जिस अधिकारी, कर्मचारी विरुद्ध सोशल मीडिया पर टिका टिप्पणी होती है वह सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर संबधितों से बहस करने को से बचते हैं
लेकिन धामनोद में गत रात्रि को दो तीन वाट्सएप ग्रुपों में पटवारी एवं ज्ञापन से संबंधित किसान के बीच खुल कर बहस हुई किसान का आरोप है कि पटवारी शीट में गड़बड़ी है, तहसील कार्यालय में ग्राम धामनोद का सन 1956-57 का राजस्व नक्शा उपलब्ध नहीं है.. आदि विस्तारित आरोप है
जिस पर संबंधित पटवारी ने वाट्सएप ग्रुपों में किसान के मैसेज को लेकर टिप्पणी कर लिखा है कि रिकॉर्ड तहसील कार्यालय में उपलब्ध है साथ ही किसान पर भी आरोप लगाया है कि समाचार में जिन सर्वे नंबरों का उल्लेख है उक्त भूमि एक ही परिवार से संबंधित है उक्त किसान भाई शासकीय सर्वे क्रमांक 1442 नाले की शासकीय भूमि को स्वयं की निजी न करने पर इस प्रकार की शिकायत करेंगे या करवाएंगे , नाले की भूमि शासकीय है आप की नहीं|
अब इस पूरे मामले पर शासन एवं प्रशासन को शिघ्र संज्ञान लेने की आवश्यकता है, किसानों एवं पटवारी के भी आरोप गंभीर हैं किसानों के आरोप पर गौर किया जाये तो राजस्व विभाग के सबसे निचली पायदान पर काबिज कर्मचारी राजस्व रिकॉर्ड में इतनी बड़ी गड़बड़ी केसे कर सकता है
क्या राजस्व विभाग में पटवारी ही प्रथम व उच्च अधिकारी होता है
जांच का विषय है |
वहीं संबंधित पटवारी का आरोप भी गंभीर हैं की उक्त किसान शासकीय भूमि को स्वंय की न करने पर इस प्रकार की शिकायत करेंगे या करवाएंगे, तो क्या नगर में इस किसान द्वारा पूर्व में भी किसी शासकीय सर्वे नम्बर को अपनी निजी भूमि करवाया गया या अन्य ने भी कहीं शासकीय भूमि को अपने नाम करवाया है या कब्जा किया गया है किया जा रहा है विषय गंभीर हैं उच्च अधिकारीयों को संज्ञान ले कर नगर के किसानों एवं प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों के बीच समन्वय स्थापित करने हेतु कदम उठाने चाहिए|
वहीं धामनोद नगर से दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेसवे निकलने के करण धामनोद क्षेत्र की भूमि की किमत प्रति बीघा 10 लाख से 1 करोड़ तक है, अगर किसानों की भूमि को लेकर राजस्व गड़बड़ी जाने अंजाने में भी होती है तो किसानों में वाद विवाद बडने के साथ ही संबंधित किसानों की किमती भूमि ही किसानों की बर्बादी का कारण बन सकती है
धामनोद की भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में संदेह के चलते शासन को धामनोद क्षेत्र की समस्त भूमि की मेंटेनेंस नप्ति करवाना चाहिए|

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