गतवर्ष सितम्बर- अक्तूबर में भारी बारिश के कारण सोयाबीन की खडी़ फसलों में हो गया था अंकुरण
रतलाम:09 जून 2020(स्पष्ट खबर) मध्यप्रदेश का गोल्ड पीला सोना कहलाने वाली सोयाबीन की खरीफ बुआई के लिए इस वर्ष किसानों के पास उपजाऊ बीज नहीं होने से किसानों में सोयाबीन की खरीफ बुआई करने को लेकर दुविधा बनी हुई है| सोयाबीन जिले की मुख्य फसल है अनुमति सोयाबीन 210000 हेक्टेयर में बोई जाती है तथा वार्षिक उत्पादन 17300 मे.टन है|| लेकिन इस वर्ष सोयाबीन की बुआई करने को लेकर किसान भारी चिंता में है जिसका मुख्य कारण बीज के सोयाबीन उपलब्ध नहीं होना है, गतवर्ष सोयाबीन फसल की कटाई निकलाई के समय सितम्बर- अक्तूबर में लगातार भारी बारिश के कारण किसानों की फसलें खेतों में ही बर्बाद हो चुकी थी, अधिक बारिश के चलते सोयाबीन की खडी़ फसलों की बालियां में अंकुरण हो चुका था जिस से बताया जाता है की 90% किसानों के पास उपजाऊ बीज नहीं है,
इस विकट परिस्थितियों में अन्नदाता किसान सरकार की और उम्मीद की नज़र से देख रहा है, लेकिन कृषि विभाग की और से किसानों की चिंता बढाने वाली खबर यह है कि किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने हेतु कृषिविभाग रतलाम में बीज के सोयाबीन आयेगें की नहीं इस पर भी अभी स्पष्ट खबर नहीं है, इस विषय में श्री मोहनिया उप संचालक कृषिविभाग रतलाम से संपर्क नहीं हो पाया है, लेकिन कृषि विभाग सुत्रों के अनुसार अभी तक सोयाबीन बीज का एक दाना भी आने का आडर नहीं है बारिश बोवनी में समय है तो बीज के सोयाबीन आने की उम्मीद है| वहीं इस का फायदा उठा कर बीज बिक्रेता कंपनियों द्वारा उंचे दाम में बीना गारंटी का बीज खपाया जा रहा है सोयाबीन बीज की किल्लत के कारण बीना गारंटी वाला बीज भी 6,000 रु से 7,000 रु क्विंटल के भाव से मिल रहा है प्रमाणित बीज के लिए किसानों की उम्मीद अब कृषि विभाग पर टिकी हुई है अगर किसानों को खरीफ बुआई के लिए प्रमाणित बीज उपलब्ध नहीं होता है तो इस वर्ष सोयाबीन उत्पादन में भारी कमी होकर किसानों को भारी आर्थिक हानि होना तय माना जा रहा है|