रतलाम/अखाड़े हमारे भारत की परंपरा, इन्हें बचाना जरूरी: तुषार कोठारी
Last Updated: जुलाई 30, 2026 " 06:08 अपराह्न"
श्री पवन पुत्र व्यायामशाला धामनोद का सम्मान समारोह, 30 साल पूर्ण
रतलाम,(स्पष्ट खबर)। गुरु पूर्णिमा पर्व के अवसर पर श्री पवन पुत्र व्यायामशाला धामनोद के स्थापना के 30 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर व्यायामशाला के सहयोगियों एवं गत वर्ष उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों का भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार एवं एडवोकेट तुषार कोठारी, युवा भारत स्वाभिमान के प्रदेश प्रभारी प्रेम पुनिया, भाजपा सैलाना के पूर्व मण्डल अध्यक्ष श्याम धाकड़, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा डिंडोर, उपाध्यक्ष ठा. लोकेन्द्रसिंह सिसोदिया एवं कन्हैयालाल पाटीदार उपस्थित रहे।
अतिथियों का स्वागत साफा बांधकर, पुष्पहार पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। अतिथियों का स्वागत व्यायामशाला के विक्रम निनामा, मनोहर मालीवाड़, सुरेश कटारा, सत्यनारायण खराड़ी, जितेन्द्र पाटीदार, भरत, समरथ खराड़ी, अजय, दीपक डोडियार, सुरेश, रवि ओहरी आदि ने किया।
समारोह में समाजसेवी देवीलाल पाटीदार, डॉ. दिनेश राव, मोहनलाल शर्मा, जगदीश पाटीदार, डॉ धुल सिंह पंवार, संजय जैन, दिनेश पुरोहित, डॉ राजेन्द्र शर्मा, उमेश पोरवाल, राजेश पाटीदार, मुकेश बब्लू शर्मा, सांवरिया राव, चेतराम पाटीदार, दलपत सिंह टमा बापू, अभिषेक लक्ष्कार, इंजी. राहुल माली, इंजी. राहुल जाट सहित शस्त्र कला में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बालक-बालिकाओं को भी पुष्पहार पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
अखाड़े भारत की परंपरा: तुषार कोठारी मुख्य अतिथि तुषार कोठारी ने कहा कि अखाड़ों से धामनोद की एक अलग पहचान और धमक रही है। उस धमक को बनाए रखने में अखाड़े और अखाड़े के उस्ताद का बड़ा रोल रहता है। अखाड़े में शरीर अंदर से मजबूत बनता है, अखाड़े हमारे भारत की पुरातन परंपरा हैं। रतलाम शहर में भी हर गली में अखाड़े हुआ करते थे। आज अखाड़े की जगह फैशन में जिम और जिम्नास्ट ने ले ली है। लेकिन बड़ा अंतर यह है कि अखाड़े में सबसे पहले हनुमानजी के चरण, फिर उस्ताद के पैर छूकर साधना शुरू होती थी।
अखाड़े और योग को अपनाएं: प्रेम पुनिया प्रेम पुनिया ने कहा कि अखाड़े और योग भारत की परंपरा हैं। इन्हें दिनचर्या में शामिल करने से तन-मन स्वस्थ और शुद्ध रहते हैं।
परंपराएं सुचारू रहनी चाहिए: श्याम धाकड़ श्याम धाकड़ ने कहा कि धार्मिक परंपराओं में अखाड़ों का विशेष महत्व है। सम्मान और प्रोत्साहन से युवाओं में ऊर्जा आती है। ऐसे आयोजन निरंतर होने चाहिए।
कार्यक्रम का गरिमामय संचालन सांवरिया राव ने किया। आभार व्यायामशाला संचालक मुकेश चौधरी ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में व्यायामशाला के सदस्य एवं नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।